त’आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं

त’आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं

 

त’आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं
ना उसकी मिसाल है गर तो मेरा भी जवाब नहीं

From the book: सुख़न का सफ़र

धन्यवाद,
– नितिन
 

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