हिंदी फिल्मों का सफ़र: 1930s (The Talkie Revolution)

Yaadon Ke Sang
हिंदी फिल्मों का सफ़र: 1930s (The Talkie Revolution) [sm-youtube-subscribe]   1930s के दशक को The Talkie Revolution के नाम से जाना जाता है। इस दौर में आई फिल्मों ने न सिर्फ हमें डायलॉग दिए बल्कि इन्होंने वह नींव रखी जिसने गानों और संगीत को फिल्मों का अटूट हिस्सा बना दिया। इस वीडियो में हम इसी सफ़र की थोड़ी सी झलक देखेंगे और चंद फिल्मों की बातें करेंगे। धन्यवाद, - नितिन  
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तेरे जाने के बाद आई तेरी याद मगर कुछ देर के बाद

Sukhan
तेरे जाने के बाद आई तेरी याद मगर कुछ देर के बाद [sm-youtube-subscribe]   तेरे जाने के बाद आई तेरी याद मगर कुछ देर के बाद उसने सुनी तो मेरी फरियाद मगर कुछ देर के बाद From the book: सुख़न का सफ़र धन्यवाद, - नितिन  
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मुझसे रूठा है जो शायद कोई यार होगा

Sukhan
मुझसे रूठा है जो शायद कोई यार होगा [sm-youtube-subscribe]   मुझसे रूठा है जो शायद कोई यार होगा उसके शिकवे में भी तो छुपा कोई प्यार होगा From the book: सुख़न का सफ़र धन्यवाद, - नितिन  
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History of Hindi Films: 1910s-1920s (The Silent Era)

Blogs, Yaadon Ke Sang
History of Hindi Films: 1910s-1920s (The Silent Era) [sm-youtube-subscribe]   जानिए भारतीय और हिंदी फिल्मों के इतिहास के बारे में। 1910s-1920s के काल को Silent Era के नाम से जाना जाता है। इस दौर ने भारतीय सिनेमा की ऐसी मज़बूत नींव रखी जिसकी बुनियाद पर हमें कितनी ही ख़ूबसूरत और कालजयी फिल्में देखने को मिली। इस वीडियो में हम इसी सफ़र की थोड़ी सी झलक देखेंगे और चंद फिल्मों की बातें करेंगे। धन्यवाद, - नितिन  
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दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं

Sukhan
दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं [sm-youtube-subscribe]   दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं बहार आती है जब मेरे सनम निकलते हैं From the book: सुख़न का सफ़र धन्यवाद, - नितिन  
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त’आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं

Sukhan
त'आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं [sm-youtube-subscribe]   त'आरुफ़ में अपने क्या कहूँ ज़र्रा हूँ आफ़ताब नहीं ना उसकी मिसाल है गर तो मेरा भी जवाब नहीं From the book: सुख़न का सफ़र धन्यवाद, - नितिन  
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Sukhan Ka Safar (सुख़न का सफ़र) is available now!

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दोस्तों, आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐💐 मेरी ग़ज़लों की नई किताब "सुख़न का सफ़र" अब Rajmangal Publishers द्वारा उपलब्ध है। इसका सारांश में परिचय है: सुख़न (काव्य) क्या है? यह भावनाओं का इज़हार है, जीवन के अनुभवों का सार है। मेरे लिए सुख़न एक हमसफ़र की तरह है जिसने हर छोटी-बड़ी बात को संग जिया है। या यूँ कह लीजिए जीवन का सफ़र "सुख़न का सफ़र" है। यह किताब शायद आपकी भी हमसफ़र बन जाए। https://nitinpatil.net/books/sukhan-ka-safar/ आप निम्न लिंक द्वारा ऑर्डर कर सकते हैं: Paperback Amazon.in Rajmangal Publishers Amazon.com eBook Amazon.in Amazon.com धन्यवाद, - नितिन 🙏  
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