गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है
गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है [sm-youtube-subscribe] यह ग़ज़ल दोस्ती के जज़्बे को कुछ इस तरह सलाम करती है गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है पाया है जो मगर वो तो सितारा है From the book: सुख़न का सफ़र शुक्रिया, - नितिन
