अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए
अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए [sm-youtube-subscribe] प्यार में जो हल्की-सी गुदगुदाहट होती है, वह खोए-खोए रहना, बिना बात मुस्कुराना, कुछ ऐसे ही जज़्बात को छूती है यह ग़ज़ल जिसका एक शेर है: अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए यह ख़्वाब है तो ना जगाया कीजिए From the book: सुख़न का सफ़र शुक्रिया, - नितिन
