दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं
दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं
बहार आती है जब मेरे सनम निकलते हैं
From the book: सुख़न का सफ़र
धन्यवाद,
– नितिन
दीदार-ए-यार से दिल के सारे ग़म निकलते हैं
बहार आती है जब मेरे सनम निकलते हैं
From the book: सुख़न का सफ़र
धन्यवाद,
– नितिन