अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए

अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए

 

प्यार में जो हल्की-सी गुदगुदाहट होती है, वह खोए-खोए रहना, बिना बात मुस्कुराना, कुछ ऐसे ही जज़्बात को छूती है यह ग़ज़ल जिसका एक शेर है:

अरमान-ए-दिल को ना सताया कीजिए
यह ख़्वाब है तो ना जगाया कीजिए

From the book: सुख़न का सफ़र

शुक्रिया,
– नितिन
 

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