इस बज़्म को यूँ ही सजाए रखना
यह ग़ज़ल उन क़रीबी रिश्तों की नज़र है जिनकी वजह से हमारी ज़िंदगी जगमगाती है।
इस बज़्म को यूँ ही सजाए रखना
इस प्यार को यूँ ही बनाए रखना
From the book: सुख़न का सफ़र
शुक्रिया,
– नितिन
यह ग़ज़ल उन क़रीबी रिश्तों की नज़र है जिनकी वजह से हमारी ज़िंदगी जगमगाती है।
इस बज़्म को यूँ ही सजाए रखना
इस प्यार को यूँ ही बनाए रखना
From the book: सुख़न का सफ़र
शुक्रिया,
– नितिन