गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है
यह ग़ज़ल दोस्ती के जज़्बे को कुछ इस तरह सलाम करती है
गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है
पाया है जो मगर वो तो सितारा है
From the book: सुख़न का सफ़र
शुक्रिया,
– नितिन
यह ग़ज़ल दोस्ती के जज़्बे को कुछ इस तरह सलाम करती है
गर्दिश-ए-वक़्त ने वैसे तो मारा है
पाया है जो मगर वो तो सितारा है
From the book: सुख़न का सफ़र
शुक्रिया,
– नितिन